एक वाक्य में
प्रकृति के तीन मूल गुण — सत्त्व (प्रकाश, ज्ञान, शान्ति), रजस (क्रिया, राग, अशान्ति), तमस (अज्ञान, आलस्य, मोह)। हर मनुष्य, हर क्षण इनके मिश्रण से बना है; जो प्रबल हो, वही हमारा वर्तमान रूप।
इसका वास्तविक अर्थ
गीता का अध्याय 14 तीनों के लक्षण, फल, और बन्धन-स्वभाव बताता है। सत्त्व सुख और ज्ञान से बाँधता है (पर सूक्ष्म बन्धन), रजस कर्म और राग से बाँधता है (बीच का), तमस आलस्य और मोह से बाँधता है (सबसे स्थूल)। मार्ग — सत्त्व से बाँध रखना, पर अन्तत: तीनों के पार जाना — गुणातीत होना।
आज के जीवन में प्रयोग
दिन की शुरुआत में पहचान लें — आज प्रबल गुण कौन-सा है? सत्त्व का दिन हो तो ध्यान, अध्ययन, दीर्घ-योजना। रजस का दिन हो तो कार्य, परिश्रम, दौड़। तमस का दिन हो तो विश्राम, सेवा, सरल कर्म। गुण के विरुद्ध मत लड़ो — उसके अनुकूल बहो।