श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 6 / 18 · 47 श्लोक · Read in English
6. ध्यानयोग — ध्यान का योग
Dhyāna Yoga (ध्यानयोग)
meditation
सार
श्रीकृष्ण ध्यान का सम्पूर्ण विज्ञान देते हैं — आसन, स्थान, मन की एकाग्रता, इन्द्रिय-संयम, तथा क्रमिक अभ्यास। मन चंचल है — पर वैराग्य और अभ्यास से वशीभूत हो सकता है। योगी की पहचान — जो सुख-दुख में, मित्र-शत्रु में, मान-अपमान में समदृष्टि रखता है। यह अध्याय बाहरी कर्म से भीतरी एकाग्रता की ओर का सेतु है।
मूल शिक्षा
मन को मन से उठाओ, मन से ही गिराओ मत — स्वयं को अपना मित्र बनाओ, शत्रु नहीं।
आज के जीवन में प्रयोग — इस अध्याय के कारण आज क्या करना है
दिन में 10 मिनट का स्थिर ध्यान — कोई मन्त्र, कोई श्वास-गणना, कोई दृश्य-केन्द्रण — आधुनिक मन की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ध्यान कोई आध्यात्मिक विलासिता नहीं; यह कार्य-क्षमता का आधार है।
इस अध्याय के प्रसिद्ध श्लोक (अंग्रेज़ी में)