श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 / 18 · 28 श्लोक · Read in English

8. अक्षरब्रह्मयोग — अविनाशी ब्रह्म का योग

Akṣara Brahma Yoga (अक्षरब्रह्मयोग)

death

सार

अर्जुन पूछते हैं — "मृत्यु के क्षण में जिस वस्तु का स्मरण हो, वही गति मिलती है — तो वह वस्तु क्या है?" श्रीकृष्ण उत्तर देते हैं — जीवन भर का अभ्यास ही अंत-समय का स्मरण निर्धारित करता है। जो अन्त-काल में मेरा स्मरण करते हुए शरीर त्यागते हैं, वे मुझे ही प्राप्त होते हैं। प्रत्येक श्वास-क्षण मृत्यु की पूर्व-तैयारी है।

मूल शिक्षा

मृत्यु में जो स्मरण होगा, वह जीवन भर का अभ्यास ही होगा — आज जिसे बार-बार सोचते हैं, अन्त में वही दिखेगा।

आज के जीवन में प्रयोग — इस अध्याय के कारण आज क्या करना है

जिस वस्तु को आप दिन भर सोचते हैं — चिन्ता, क्रोध, लोभ, या प्रेम, सेवा, शान्ति — वही आपके मानस का स्थायी रूप बनती जा रही है। आज जो बोते हैं, अन्त-समय में वही फल पाते हैं।

कृष्ण से प्रश्न पूछें गुण-स्व-परीक्षण लें